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RAJASTHANI ESSAY BOOKKA ‘आंगळी-सीध’ डॉ. नीरज दइया री महताऊ आलोचना कृति है, जिण में कहाणी अर उपन्यास रौ अंतर इतिहासू रूप सूं दरसायौ गियौ है। उपन्यास रै विकास में ‘कथ्य अर बुणगट’ अर ‘लोक उपन्यास : भरम...

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Category : ESSAY

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RAJASTHANI ESSAY BOOKKA ‘आंगळी-सीध’ डॉ. नीरज दइया री महताऊ आलोचना कृति है, जिण में कहाणी अर उपन्यास रौ अंतर इतिहासू रूप सूं दरसायौ गियौ है। उपन्यास रै विकास में ‘कथ्य अर बुणगट’ अर ‘लोक उपन्यास : भरम रा भाठा’ जैड़ा आलोचना लेख राजस्थानी आलोचना नै समृद्ध तो करै ईज है, उण भरम रै जाळां नै ई तोड़ै जिकौ राजस्थानी आलोचना में पसरियोड़ा है। ‘आंगळी-सीध’ 1956 में श्रीलाल नथमल जोशी रै उपन्यास सूं सरू होय’र 2019 में मनोज कुमार स्वामी रै आत्मकथात्मक उपन्यास तक आवै। अन्नाराम सुदामा, यादवेंद्र शर्मा चंद्र, सीताराम महर्षि, पारस अरोड़ा, करणीदान बारहठ जैड़ै उपन्यास लेखकां माथै लिख’र डॉ. दइया राजस्थानी समाज, नारी री ओळखांण, उपन्यास लेखन री परंपरा जैड़ै मुद्दां माथै आलोचनात्मक दीठ देवै। उपन्यास लेखन री इण जातरा रा जिका पड़ाव है उण नै पोखणिया लेखकां में नारी लेखन रौ ई महताऊ पख रैयौ है अर डॉ. दइया उण पख नै ई उजागर कीनौ है। बसंती पंवार, रीना मेनारिया, अनुश्री राठौड़ अर संतोष चौधरी रै उपन्यासां री आलोचना बांचता आ बात साफ हो जावै कै राजस्थानी रै उपन्यास लेखन में आ भागीदारी अजंसजोग है। युवा उपन्यासकारां में अतुल कनक, अरविंद आशिया, रामेसर गोदारा, भरत ओळा जैड़ा नांव भरोसौ देवै कै उपन्यास लेखन री नवी पीढ़ी वरिष्ठ उपन्यासकारां रै मारग नै सून्याड़ नीं वापरण देवैला। श्याम जांगिड़, नंद भारद्वाज, नवनीत पाण्डे, देवदास राकांवत, रतन जांगिड़, मधु आचार्य, जितेंद्र निर्मोही, प्रमोद शर्मा, पूरण शर्मा अर मनोज कुमार स्वामी रा नांव उपन्यास-जगत नै थ्यावस देवणाआळा नांव है अर आज रै समाज रै बदळतां हालातां, सपनां, आधुनिकता-बोध नै सबळाई सूं उजागर कीनौ है। आलोचक डॉ. नीरज दइया आपरी दीठ में कोई पूर्वाग्रह नीं राखै अर तटस्थ भाव सूं आपरी बात राखै। अठै आ बात उल्लेखजोग है कै डॉ. नीरज दइया आपरी दीठ पाठकां सांमी राखै अर पछै विकास री पड़ताळ करै। इण पड़ताळ-जातरां रा निजू भाव, वां री निजू विचारणा इण उपन्यासां नै किणी गत प्रभावित कीना है, अै बातां ई लेखक घणी ई सावचेती सूं पाठकां सांमी राखी है। उपन्यासां रौ आलोचकीय लेखौ-जोखौ इण गत पैलीबार सांमी आयौ है, इण सूं लागै कै उपन्यासां रौ कथा-फलक अर भासा-रूप भांत-भांत रौ है अर आ बात राजस्थानी उपन्यासां री सबळता उजागर करै। राजस्थानी उपन्यास-आलोचना रौ औ अेक सबळ पड़ाव है अर म्हनै लागौ कै ‘आगंळी-सीध’ आवण आळै उपन्यास लेखन माथै जबरदस्त असर करैला अर उपन्यास लेखन नै सबळ अर विचार-प्रवण बणावैला। – डॉ. आईदान सिंह भाटी (वरिष्ठ कवि-आलोचक)