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पुस्तक ‘बुलाकी शर्मा के सृजन-सरोकार’ में राजस्थानी और हिंदी के वरिष्ठ लेखक बुलाकी शर्मा के सृजन के साथ-साथ एक आत्मीय भाषा में उनके लेखक को जानने का भी सुंदर और अविस्मरणीय प्रयास आलोचक डॉ. नीरज दइया ने...
पुस्तक ‘बुलाकी शर्मा के सृजन-सरोकार’ में राजस्थानी और हिंदी के वरिष्ठ लेखक बुलाकी शर्मा के सृजन के साथ-साथ एक आत्मीय भाषा में उनके लेखक को जानने का भी सुंदर और अविस्मरणीय प्रयास आलोचक डॉ. नीरज दइया ने किया है। इस कृति पर लेखक को द्विवेदी युग के ख्यात निबंधकार, विचारक, लेखक बाबू मावलीप्रसाद श्रीवास्तव की स्मृति में प्रतिवर्ष दिया जानेवाला सम्मान 2017 में अर्पित किया गया है। यह सम्मान बाबू मावलीप्रसाद श्रीवास्तव साहित्यपीठ, रायपुर द्वारा प्रतिवर्ष निबंध विधा पर उल्लेखनीय कार्य के लिए प्रदान किया जाता है । यह विशिष्ट सम्मान समीक्षक-निबंधकार श्री नीरज दइया को सृजनगाथा डॉट कॉम के मुख्य संयोजन में आयोजित हुए 14 वें अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन के अंलकरण समारोह, उदयपुर, राजस्थान में 11 अक्टूबर, 2017 को प्रदान किया गया। चयन समिति में सुप्रसिद्ध आलोचक डॉ. खगेन्द्र ठाकुर (पटना), वरिष्ठ लेखिका-समीक्षक डॉ. रंजना अरगड़े (अहमदाबाद), वरिष्ठ कथाकार तथा उ.प्र.हिंदी संस्थान के पूर्व निदेशक डॉ. सुधाकर अदीब(लखनऊ), वरिष्ठ लेखिका, साहित्य अकादमी की सदस्या डॉ. मीनाक्षी जोशी (भंडारा), मावलीप्रसाद श्रीवास्तव साहित्यपीठ, रायपुर के संस्थापक-सचिव-शंकर श्रीवास्तव (रायपुर) तथा जयप्रकाश मानस (संयोजक) थे । पुस्तक के संबंध में चयन समिति ने अपनी संस्तुति में कहा कि “ श्री दइया की इस कृति में संग्रहित निबंध किसी रचनाकार के व्यक्तित्व और कृतित्व को समझने और परखने की कथित रूप से ज़रूरी अकादमिक और क्लासिक परंपरावाली क्लिष्टता और संशलिष्टता के बरक्स आत्मीय और सहज रागात्मक भाषा में मूल्याँकन के नये और कारगर टूल्स को चिह्नांकित करते हैं ।” यह कृति आलोचना की नई भाषा का आगाज करती हमारे समकालीन रचनाकारों पर आलोचनात्मक कार्य किए जाने का महत्त्व भी प्रतिपादित करती है।