*पंच काका के जेबी बच्चे* समकालीन जीवन की विसंगतियों को व्यंग्य की दृष्टि से देखने और समझने के लिए डॉ. नीरज दइया का यह व्यंग्य-संग्रह पाठकों को आमंत्रित करता है। सामाजिक व्यवहार और जीवन की विडंबनाओं प...
*पंच काका के जेबी बच्चे* समकालीन जीवन की विसंगतियों को व्यंग्य की दृष्टि से देखने और समझने के लिए डॉ. नीरज दइया का यह व्यंग्य-संग्रह पाठकों को आमंत्रित करता है। सामाजिक व्यवहार और जीवन की विडंबनाओं पर व्यंग्यात्मक नजर डालने वाली रचनाओं में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए यह पुस्तक उपयोगी है। हिंदी व्यंग्य साहित्य के पाठकों को डॉ. दइया की व्यंग्य-दृष्टि से परिचित कराने वाला प्रतिनिधि संग्रह।