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नीरज दइया दूजी भासावां री रचनावां रो राजस्थानी में अनुसिरजण करनै राजस्थानी साहित्य रै पाठकां नै नवी भाव-भूमि, नवी बुणगट-कथ री रचनावां बरसां सूं सूंपता रैया है। अमृता प्रीतम, भोलाभाई पटेल, निर्मल वर्मा...
नीरज दइया दूजी भासावां री रचनावां रो राजस्थानी में अनुसिरजण करनै राजस्थानी साहित्य रै पाठकां नै नवी भाव-भूमि, नवी बुणगट-कथ री रचनावां बरसां सूं सूंपता रैया है। अमृता प्रीतम, भोलाभाई पटेल, निर्मल वर्मा, नंदकिशोर आचार्य, सुधीर सक्सेना जिसा आप आप री भासावां रा नामी रचनाकारां री रचनावां बै अनुसिरजण रै मारफत राजस्थानी पाठकां तांई पूगाय’र बां नै भारतीय साहित्य सूं परिचित करावण में महतावू भूमिका निभाई है। बां आपरै कविता-संग्रै ‘सबद-नाद’ रै मारफत चौबीस भारतीय भासावां रै टाळवां कवियां री टाळवीं कवितावां राजस्थानी पाठकां साम्हीं राख नै सरावणजोग काम कर्यो है। सुधीर सक्सेना ई आपरै हिंदी संसार रै पाठकां नै विदेसी भासावां रै सिरजकां सूं, जरियै अनुसिरजण, मिलावता रैय है अर नीरज दइया राजस्थानी पाठकां नै भारतीय भासावां रै सिरजकां सूं रू-ब-रू करावतां रैवै। सुधीर जी रूसी, पोलिश, ब्राजील आद विदेसी भासावां रै कवियां साथै भारतीय भासावां रै कवियां री रचनावां रो हिंदी अनुसिरजण कर्यो है, बठै ई नीरज दइया हिंदी, गुजराती, पंजाबी समेत अनेक भारतीय भासावां री रचनावां अनुसिरजण रै मारफत राजस्थानी पाठकां तांई पूगाय’र बांरी सोच अर दीठ नै सिमरध करी है। निखालिस अनुवाद कै अनुसिरजक अर कवि-अनुसिरजक में खासो फरक हुवै। निखालिस अनुवादक री कोसीस रैवै कै दूजी भासा री बेसी सूं बेसी रचनावां आपरी भासा रै पाठकां तांई पूगती करी जावै, पण जिको कवि है अर अनुसिरजक ई, बो बीसी टाळवीं रचनावां आपरी भासा रै पाठकां तांई पूगावणी जरूरी समझै जिकी उण भासा नै कथ-बुणगट-चिंतन आद ढाळा माथै नवै तरीकै सूं सोचण नै मजबूर करै। सुधीर सक्सेना रो कविता-संग्रै ‘ईस्वर : हां, नीं... तो’ बांचता राजस्थानी पाठकां नै लागसी कै ईस्वर सूं इण ढंग-ढाळै रा सवाल बै पैली बार सुण रैया है अर बै ही कवि साथै बां रै पड़ूत्तर री उडीक राखै। - - बुलाकी शर्मा (वरिष्ठ कहानीकार-व्यंग्यकार)